Ek chhote vaanar ka ek magical playground mein transformation ka safar, jahaan woh seekhta hai ki khel mein discovery ki shakti hai.
हन्नू नाम का, एक छोटा वानर था, वन में खेलता, सपनों का सहारा था। एक दिन उसने, पाया एक दरवाज़ा, जादुई था वो, रंगों का साराज़ा। झूले पर बैठा, तो हवा हो गई, फूलों में बदला, तितली सी धूम मचाई। पत्थर छू लिया, तो तारे चमके, पानी में देखे, सपने जैसे दमके। खेल-खेल में सीखा, यह राज नया, हर चीज़ में छुपा, कुछ जादू है प्यारा। छोटे से हाथ में, है बड़ी शक्ति, खेलने से मिलती, नई दुनिया की राह। शाम हुई, तारे चमके आसमान, हन्नू सोया, सपनों में फिर जान। सोचता रहा, कल क्या खेल खेलेगा, जादुई महल में, फिर क्या देखेगा?
Continue reading with a free account...
Free — no credit card required