Cover for Samudra ki Chhupi Duniya
Poem9-12 yrs1 min

Samudra ki Chhupi Duniya

Ek bahadur bachche ki kahani jo samudra ki gahrayi mein jaati hai aur wahaan ke jaadui jeevan ko dekhti hai

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आरव था एक बालक, दिल में था सपना गहरा, समुद्र के किनारे, रहता था वो हमेशा साथ उसके। एक दिन उसने सोचा, क्या है नीचे की दुनिया? मछलियों की बातें, लहरों का है राज क्या? पानी में उतरा, गहरी नीली छाँव, साँसों को रोक के, देखी एक नई जान। चमकती मछलियाँ, रंग-बिरंगी, उड़ते हुए कछुए, लहरों के संगी। धीरे-धीरे बदले, पानी की गतियाँ, बनाती हैं लहरें, जैसे कोई गीत गातीं। सागर की आवाज़, सुनाई देती है, एक नई कहानी, हर पल सुनाती है। आरव ने देखा, एक अनोखा नज़ारा, जीवन का रंग, समुद्र ने सारा। वो समझ गया, सब कुछ है जुड़ा, पर एक दूसरे से, है ये सब मिला। अब हर रात, सपने में आती है, समुद्र की दुनिया, उसको बुलाती है। सो जा बालक, कल फिर से जाना, नई कहानी, नई दुनिया पाना।

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