Cover for Kira Ka Samudri Ghar Ki Khoj
Poem2-5 yrs1 min

Kira Ka Samudri Ghar Ki Khoj

Ek brave chhoti ladki Kira apne island ghar mein family ke saath naye kamre discover karti hai aur cozy sleeping jagah paati hai.

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किरा छोटी सी, बहादुर थी, द्वीप पे रहती, खुशियों भरी थी, माँ-पिता के संग, घूमती फिरती, नए कमरे की खोज में लगे करती। बाँस की दीवारें, चिकने गलचे, समुंदर का दृश्य, सुंदर दिखे, दादी ने कहा, "बेटा देख यहाँ, सीपियाँ, मोती हैं, खूब रहे यहाँ।" परिवार का खजाना, मिल गया यहीं, लहरों की आवाज़, सुन सुन कर, किरा थक गई, नींद आ गई, गलचे पे लेटी, सपने सज गई। समुंदर की हवा, लोरी सुनाए, तारे चमकते, रात जगमगाए, परिवार का प्यार, गहरे सन्नाटे, शांति से सोई, किरा सपने बुनने।

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