Cover for Advait aur Uske Doston ki Bhavishya Yatra
Story9-12 yrs2 min

Advait aur Uske Doston ki Bhavishya Yatra

Ek 10 varsh ka ladka advait apne doston ke saath ek bhavishya yatra par jata hai, jaha unhe nayi cheezein seekhne aur apne doston ke saath masti karne ka mauka milta hai. Is yatra mein ve apne aaspas ke sansar ko samajhne aur apne lakshyon ko praapt karne ke liye kai chunautiyon ka saamna karte hain.

Story Preview

हिमालय की गोद में, एक छोटी सी गूम्फी थी, जहाँ आद्वैत अपने दोस्तों के साथ रहता था। वहाँ की सुबहों में, हवाएँ सर्द और मीठी होती थीं, और उनकी आवाज़, जैसे कोई पुरानी कहानी सुनाती हो। एक दिन, उनके गुरुजी ने उन्हें एक अजब सा सपना सुनाया—एक ऐसा सपना, जो उन्हें भविष्य की ओर ले जा सकता था। "चलो, बच्चो," गुरुजी ने मुस्कुराते हुए कहा, "आज हम एक यात्रा पर जा रहे हैं, जहाँ तुम्हें ऐसी चीज़ें देखने को मिलेंगी, जो तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा!" आद्वैत और उसके दोस्तों—रिया, अर्जुन, और चिंटू—ने झट से अपने थैलों में ज़रूरी चीज़ें भरीं, और उनकी यात्रा शुरू हो गई। उनका पहला रुकाव था—एक ऐसा शहर, जहाँ घर पेड़ों पर बनते थे, और सड़कें आसमान से गुज़रती थीं। वहाँ, उन्हें एक रोबोट मिला, जिसका नाम 'दृष्टि' था। दृष्टि ने उन्हें एक भूलभुलैया में ले जाया, जहाँ हर रास्ता एक नई चुनौती लेकर आता था। "यहाँ से निकलने के लिए," दृष्टि ने कहा, "तुम्हें एक-दूसरे पर भरोसा करना होगा।" आद्वैत ने अपने दोस्तों की ओर देखा—रिया की आँखों में धैर्य था, अर्जुन के चेहरे पर एक चुटकुला, और चिंटू का हाथ, जिसे उसने पकड़ लिया। "चलो, मिलकर निकलते हैं!" आद्वैत ने कहा, और सबने एक साथ कदम बढ़ा दिए। भूलभुलैया के बाद, वे एक ऐसे उद्यान में पहुँचे, जहाँ फूल रात को चमकते थे, और पेड़ों की पत्तियाँ गीत गाती थीं। "ये तो जैसे कोई सपना हो," रिया ने कहा। वहाँ, उन्हें एक ऐसी मशीन मिली, जो उनके सोचने से भी तेज़ थी—उसने उनके ख़यालों को चित्रों में बदल दिया! सबने अपने-अपने ख़यालों को बनाया, और उनके चेहरों पर मुस्कुराहट फैल गई। लेकिन फिर, एक समस्या आ गई। उद्यान की एक मशीन ख़राब हो गई, और उसके कारण, पूरा शहर अंधेरे में डूबने लगा। "अब हम क्या करें?" चिंटू ने डरते-डरते पूछा। आद्वैत ने सोचा, फिर बोला, "हम सबके पास कुछ न कुछ तो है, जो इस समस्या का समाधान हो सकता है।" रिया ने अपनी विज्ञान की किताब निकाली, अर्जुन ने अपने हाथ से काम किया, और चिंटू ने अपनी चतुराई से सबको सहायता दी। मिलकर, उन्होंने मशीन को ठीक किया, और फिर से शहर जगमगा उठा। रात होने पर, सब थक कर एक चबूतरे पर बैठ गए। "आज की यात्रा तो यादगार रहेगी," अर्जुन ने कहा। आद्वैत ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि हमने सीखा—मिलकर किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।" तारों की चमक और हवाओं की सरगम के बीच, सब सो गए, अपने अगले दिन की नई कहानी के लिए तैयार होते हुए।

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